अब 'आसमान' से होगी हाथियों की निगरानी: जशपुर वनमंडल में ड्रोन तकनीक का आगाज, वन अमले को मिली स्पेशल ट्रेनिंग
जशपुरनगर |
जशपुर जिले में हाथी-मानव द्वंद्व को कम करने और वन्यजीव प्रबंधन को आधुनिक बनाने की दिशा में वन विभाग ने एक बड़ी छलांग लगाई है। डीएफओ श्री शशि कुमार के मार्गदर्शन में अब हाथियों की निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इसके लिए जिले के वन अमले और रैपिड रिस्पॉन्स टीम (RRT) को चरणबद्ध तरीके से ड्रोन संचालन का कड़ा प्रशिक्षण दिया गया है।
तीन चरणों में संपन्न हुआ विशेष प्रशिक्षण
ड्रोन तकनीक को धरातल पर उतारने के लिए जिले के विभिन्न उपवनमंडलों में प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए:
पत्थलगांव उपवनमंडल: 24 जनवरी 2026 को नारायणपुर में कर्मियों को ट्रेंड किया गया।
कुनकुरी उपवनमंडल: 25 जनवरी 2026 को कुनकुरी में प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ।
जशपुर उपवनमंडल: 27 जनवरी 2026 को मनोरा में वन विभाग के जांबाजों ने ड्रोन उड़ाने और डेटा एनालिसिस के गुर सीखे।
दुर्गम इलाकों और अंधेरे में भी नहीं बच सकेंगे हाथी
ड्रोन तकनीक के आने से अब वन विभाग के पास हाथियों की 'रियल टाइम' लोकेशन होगी। इस तकनीक के मुख्य फायदे इस प्रकार हैं:
सटीक ट्रैकिंग: घने जंगलों और पहाड़ों के बीच छिपे हाथियों की सटीक स्थिति का पता लगाना।
रात्रिकालीन सर्वेक्षण: थर्मल कैमरों से लैस ड्रोन रात के अंधेरे में भी हाथियों की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सकेंगे।
त्वरित सूचना: संवेदनशील गांवों के पास हाथियों के पहुँचने से पहले ही ग्रामीणों को सतर्क किया जा सकेगा।
सुरक्षित निगरानी: वन कर्मियों को हाथियों के करीब जाने की जरूरत नहीं होगी, जिससे जानलेवा हमलों का खतरा कम होगा।
तकनीक से सुरक्षा: जन-धन की हानि रोकने की कवायद
वनमंडलाधिकारी श्री शशि कुमार ने बताया कि जशपुर जैसे चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में पारंपरिक निगरानी के साथ तकनीकी तालमेल अनिवार्य है। ड्रोन के माध्यम से प्राप्त सटीक सूचनाओं से न केवल इंसानों की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि फसलों और मकानों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
"ड्रोन तकनीक वन्यजीव संरक्षण और जन-सुरक्षा के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेगी। इससे हम आपात परिस्थितियों में अधिक तेजी और सुरक्षा के साथ कार्रवाई कर पाएंगे।" — श्री शशि कुमार, डीएफओ





