जशपुर: नशामुक्ति केंद्र से मिली अजय को नई जिंदगी; नशे की बेड़ियाँ तोड़ अब 'एग रोल' की दुकान से सजा रहे अपना भविष्य

जशपुर: नशामुक्ति केंद्र से मिली अजय को नई जिंदगी; नशे की बेड़ियाँ तोड़ अब 'एग रोल' की दुकान से सजा रहे अपना भविष्य

जशपुरनगर | 30 जनवरी, 2026

जशपुर जिले में संचालित 'नशामुक्त भारत अभियान' केवल कागजों पर नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में बदलाव के रूप में धरातल पर दिख रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण शहर के नगरीय निकाय क्षेत्र के निवासी 26 वर्षीय अजय प्रधान (परिवर्तित नाम) हैं। कभी नशे की गर्त में डूब चुके अजय आज न केवल पूरी तरह नशामुक्त हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार का स्वाभिमान भी लौटा रहे हैं।

कुसंगति का जाल और संघर्ष की कहानी

12वीं तक पढ़ाई करने वाले अजय एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। गलत संगत के कारण वे शराब, गांजा, भांग और अन्य नशीले पदार्थों के आदी हो गए थे। इसका असर उनके स्वास्थ्य के साथ-साथ परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर भी पड़ा। समाज के तानों और बेटे की गिरती हालत ने माता-पिता को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया था।

पुनर्वास केंद्र: जहाँ से शुरू हुआ बदलाव का सफर

परिवार को जब समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत भागलपुर रोड स्थित नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र की जानकारी मिली, तो उन्होंने अजय को वहाँ भर्ती कराया। केंद्र में विशेषज्ञों की देखरेख में चली अनुशासित जीवनशैली और परामर्श सत्रों ने अजय के भीतर छिपी इच्छाशक्ति को जगाया।

परामर्श सत्र: विशेषज्ञों ने अजय को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया।

प्रेरक गतिविधियाँ: अनुशासित दिनचर्या से अजय का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सुधरा।

अब 'एग रोल' दुकान से बने आत्मनिर्भर

नशामुक्ति का कोर्स पूरा कर घर लौटने के बाद अजय ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वे अपनी एग रोल की दुकान सफलतापूर्वक चला रहे हैं। वे न केवल अपना खर्च उठा रहे हैं, बल्कि अपने बूढ़े माता-पिता की सेवा और घर का भरण-पोषण भी कर रहे हैं।

अजय का कहना है:

"अब मेरे मन में नशे से दूर रहने का अटूट संकल्प है। मैं चाहता हूँ कि जो युवा इस रास्ते पर भटक गए हैं, उन्हें भी सही राह दिखाने में मदद कर सकूँ।"

सही मार्गदर्शन से बदलाव संभव: समाज कल्याण विभाग

उप संचालक, समाज कल्याण विभाग जशपुर, श्री धर्मेंद्र साहू ने इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अजय का मामला समाज के लिए एक उदाहरण है। सही मार्गदर्शन, दृढ़ इच्छाशक्ति और परिवार के सहयोग से किसी भी बुरी लत को छोड़ा जा सकता है। पुनर्वास केंद्र युवाओं को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए एक मजबूत सेतु का काम कर रहे हैं।