कांसाबेल में शराब दुकान पर 'आर-पार' की जंग: सिहारबूढ़ से वापसी के बाद अब कांसाबेल में धरना, ग्रामीणों ने कहा- 'किसी भी हाल में यहाँ नहीं चलेगी दुकान'

कांसाबेल में शराब दुकान पर 'आर-पार' की जंग: सिहारबूढ़ से वापसी के बाद अब कांसाबेल में धरना, ग्रामीणों ने कहा- 'किसी भी हाल में यहाँ नहीं चलेगी दुकान'

कांसाबेल | जशपुर जिले का कांसाबेल क्षेत्र इन दिनों शासकीय देशी-विदेशी मदिरा दुकान के स्थान परिवर्तन को लेकर अखाड़ा बन गया है। पहले इस दुकान को कांसाबेल से सिहारबूढ़ (कुसुम ताल चौक) स्थानांतरित किया गया था, जिसका वहां के ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया। जन-आक्रोश को देखते हुए दुकान को पुनः कांसाबेल के पुराने स्थान पर वापस लाया गया है, लेकिन अब यहाँ के स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने दुकान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

संवेदनशील स्थानों का हवाला, सरपंच और पंचों का धरना

​दुकान के दोबारा पुराने स्थान पर खुलते ही कांसाबेल के सरपंच, उपसरपंच और वार्ड पंचों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण दुकान के सामने धरने पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यह स्थान बेहद अति संवेदनशील है। ग्रामीणों ने प्रमुख बिंदु उठाए:

  • शैक्षणिक संस्थानों की नजदीकी: दुकान के ठीक सामने बालक/बालिका छात्रावास है और बगल में ही सरस्वती शिशु मंदिर स्थित है, जिससे छात्र-छात्राओं पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।
  • धार्मिक स्थल: पास ही में धार्मिक स्थल होने के कारण श्रद्धालुओं की आस्था और शांति भंग होने का खतरा है।
  • NOC का अभाव: सरपंच ने आरोप लगाया कि बिना किसी ग्राम पंचायत की NOC (अनापत्ति प्रमाणपत्र) के दोबारा यहाँ दुकान का संचालन शुरू कर दिया गया है, जो नियमों के विरुद्ध है।

प्रशासन के सामने असमंजस की स्थिति

​हैरानी की बात यह है कि यह शराब दुकान 'फुटबॉल' की तरह एक गांव से दूसरे गांव घूम रही है। सिहारबूढ़ में विरोध हुआ तो प्रशासन ने इसे वापस कांसाबेल भेज दिया, और अब कांसाबेल में विरोध के चलते प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों का अल्टीमेटम

​धरना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों का कहना है कि जब तक इस दुकान को यहाँ से हमेशा के लिए हटाने का निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।

सरपंच का बयान: "जब एक बार दुकान यहाँ से शिफ्ट कर दी गई थी, तो दोबारा इसे बिना अनुमति के उसी विवादित जगह पर लाना समझ से परे है। हम बच्चों के भविष्य और गांव की शांति के साथ समझौता नहीं करेंगे।"

निष्कर्ष: लगातार जारी इस धरने ने शासन-प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ राजस्व का सवाल है, तो दूसरी तरफ ग्रामीणों का भारी विरोध और बच्चों की सुरक्षा। अब देखना होगा कि आबकारी विभाग और जिला प्रशासन इस विवाद का क्या स्थायी समाधान निकालता है।