कानपुर में 5,600 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का भंडाफोड़: दो शातिर गिरफ्तार, 14 बैंकों के 72 खातों से चल रहा था खेल

कानपुर में 5,600 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का भंडाफोड़: दो शातिर गिरफ्तार, 14 बैंकों के 72 खातों से चल रहा था खेल

सर्वेश तिवारी कानपुर घाटमपुर

कानपुर:

शहर की पुलिस कमिश्नर की स्पेशल क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और एसओजी (SOG) टीम ने निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों—शाहजेव वारिस और सलमान—को गिरफ्तार किया है, जिनके तार देश के कई राज्यों से जुड़े हुए हैं।

5,600 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा

पुलिस जांच में हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इस गिरोह द्वारा संचालित 14 अलग-अलग बैंकों के 72 खातों में करीब 5,600 करोड़ रुपये के भारी-भरकम वित्तीय लेन-देन (Transactions) का पता चला है। इसके अलावा, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर इन खातों से जुड़ी 86 शिकायतें भी दर्ज पाई गई हैं।

बरामदगी

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से निम्नलिखित सामग्रियां बरामद की हैं:

  • ​65.26 लाख रुपये नकद
  • ​2 मोबाइल फोन
  • ​3 बैंक चेकबुक
  • ​2 एटीएम कार्ड
  • ​फर्जी फर्मों और बैंकिंग से जुड़े अहम दस्तावेज

ठगी का तरीका

यह गिरोह सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से लोगों को शेयर बाजार, क्रिप्टो या अन्य योजनाओं में निवेश करने पर भारी मुनाफे का लालच देता था। निवेशकों से मिलने वाली रकम को पहले फर्जी फर्मों के नाम पर खोले गए बैंक खातों में मंगाया जाता था। इसके बाद, कानून की नजरों से बचने के लिए उस रकम को कई अन्य बैंक खातों और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए घुमाया (Layering) जाता था।

पांच अन्य आरोपी वांछित

मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े पांच अन्य लोगों को वांछित घोषित किया है, जिनकी तलाश तेजी से की जा रही है:

  1. ​इितशाम हुसैन
  2. ​शाहवेज इलाही
  3. ​मो. मुजम्मिल
  4. ​इखलाख हुसैन
  5. ​मो. आरिफ

देशभर में फैला है जाल

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। कानपुर के अलावा हैदराबाद, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) और आगरा जिलों में भी इनके खिलाफ साइबर अपराध से जुड़े मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस अब बरामद किए गए मोबाइलों और डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच करवा रही है, ताकि इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य चेहरों और मददगारों बेनकाब किया जा सके। अन्य राज्यों की साइबर क्राइम टीमों से भी इस बाबत समन्वय स्थापित किया जा रहा है।