गायत्री प्रज्ञापीठ चेटबा का स्थापना दिवस समारोह: 44 वर्षों से प्रज्वलित है ज्ञान की अखंड ज्योति
चेटबा (कांसाबेल), जशपुर। विकासखंड कांसाबेल के अंतर्गत ग्राम चेटबा स्थित गायत्री प्रज्ञापीठ का प्राण-प्रतिष्ठा स्थापना दिवस रविवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर इस आयोजन में क्षेत्र के सैकड़ों गायत्री परिजनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
ऐतिहासिक स्मृतियों का पुनरागमन कार्यक्रम के दौरान प्रज्ञापीठ के गौरवशाली इतिहास को याद किया गया। उल्लेखनीय है कि 18 जनवरी 1982 को युग ऋषि परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के करकमलों द्वारा इस प्रज्ञापीठ की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी। तब से यह केंद्र निरंतर मां गायत्री और गुरुसत्ता के सूक्ष्म संरक्षण में क्षेत्र के आध्यात्मिक उत्थान के लिए कार्य कर रहा है।



यज्ञ और साधना से गूंजा परिसर स्थापना दिवस के पावन अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया:
अखंड जप: अलसुबह से ही साधकों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ अखंड जप किया गया।
पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ: लोक कल्याण की भावना के साथ पांच कुंडीय यज्ञ संपन्न हुआ।
टोली द्वारा कर्मकांड: यज्ञ का विधिवत संचालन निलेश्वरी सोरेन, मोगरा पैंकरा एवं सबीना पैंकरा की टोली द्वारा किया गया।
वैचारिक क्रांति पर जोर वरिष्ठ परिजन श्री जे. आर. यादव ने वर्ष 1982 के उस ऐतिहासिक वृतांत को साझा किया जब गुरुदेव स्वयं यहां पधारे थे। वहीं, श्री सी. बी. पैंकरा ने गायत्री मिशन की विभिन्न गतिविधियों और समाज निर्माण में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने बताया कि प्रज्ञापीठ के माध्यम से गुरुदेव के 'सप्त क्रांतिकारी आंदोलनों' और 'अखंड ज्योति' पत्रिका के विचारों को घर-घर तक पहुँचाया जा रहा है।
शुभकामनाओं के साथ समापन कार्यक्रम के अंत में विकासखंड समन्वयक श्री प्रेम शंकर यादव ने सभी उपस्थित परिजनों को स्थापना दिवस की बधाई देते हुए गुरुदेव के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प दिलाया। आयोजन में क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।





