सफलता की कहानी: मनरेगा की 'आजीविका डबरी' से बदली मधुसूदन की किस्मत, सालाना कमा रहे 2.20 लाख रुपये अतिरिक्त

सफलता की कहानी: मनरेगा की 'आजीविका डबरी' से बदली मधुसूदन की किस्मत, सालाना कमा रहे 2.20 लाख रुपये अतिरिक्त

जशपुर | 14 अप्रैल 2026 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में जल संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत निर्मित 'आजीविका डबरी' किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। विकासखंड बगीचा के ग्राम कुदमुरा निवासी किसान मधुसूदन इसके प्रत्यक्ष उदाहरण बन गए हैं।

2.85 लाख की लागत से हुआ डबरी निर्माण

किसान मधुसूदन पिता भादो को ग्राम पंचायत की बैठक से जानकारी मिली कि मनरेगा के तहत छोटे किसानों की निजी भूमि पर डबरी निर्माण कराया जाता है। योजना के लाभ से उनकी कृषि भूमि पर 2.85 लाख रुपये की लागत से डबरी का निर्माण हुआ। इस निर्माण कार्य से न केवल जल संवर्धन हुआ, बल्कि गांव के 52 जॉब कार्डधारी परिवारों को रोजगार भी मिला, जिससे 1565 मानव दिवस का सृजन हुआ।

मछली पालन और उद्यानिकी से बढ़ी आय

डबरी निर्माण के बाद मधुसूदन के पास सिंचाई की स्थाई सुविधा उपलब्ध हो गई, जिससे उन्होंने बहुआयामी खेती शुरू की:

  • सब्जी उत्पादन: डबरी के पास की 80 डिसमिल जमीन पर टमाटर, फूलगोभी और मिर्च जैसी उद्यानिकी फसलें उगाकर वे सालाना 1.50 लाख रुपये कमा रहे हैं।

  • मत्स्य पालन: डबरी में मछली बीज डालकर उन्होंने मत्स्य पालन शुरू किया, जिससे उन्हें हर साल लगभग 70 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है।

  • कुल लाभ: डबरी के माध्यम से मधुसूदन अब प्रतिवर्ष लगभग 2.20 लाख रुपये की अतिरिक्त वार्षिक आमदनी अर्जित कर रहे हैं।

जिले में 480 डबरियों का निर्माण

जिले में अब तक कुल 480 आजीविका डबरियों का निर्माण किया जा चुका है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण के साथ-साथ:

  1. भूमिगत जल स्तर में वृद्धि करना।

  2. किसानों को सिंचाई के लिए आत्मनिर्भर बनाना।

  3. मत्स्य पालन और बागवानी के जरिए आजीविका के नए स्रोत खोलना है।

मधुसूदन की यह सफलता आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक और एकीकृत कृषि प्रणालियों को अपनाकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।