जशपुर का अर्जुन आंध्र प्रदेश में बंधक या लापता? बेरहमी से पिटाई का वीडियो देख रोया परिवार; पुलिस बोली- 'कार्रवाई हमारे हाथ में नहीं'
रामसदन चौहान की कलम से
गाँव के युवकों के साथ मजदूरी करने गया था अर्जुन राम चौहान, रस्सी से बंधे और बर्बरतापूर्वक मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद परिजनों को अनहोनी की आशंका, गाँव लौटे साथी छुपा रहे नजर।
(जशपुर/कांसाबेल):
रोजगार की तलाश में अपना घर-गाँव छोड़कर दूसरे राज्यों में जाने वाले छत्तीसगढ़ के प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा एक बार फिर बड़े सवालों के घेरे में है। जशपुर जिले के कांसाबेल तहसील अंतर्गत ग्राम बहमा (पोस्ट नकबार) से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने एक गरीब परिवार की रातों की नींद उड़ा दी है। गाँव का एक सीधा-साधा युवक, अर्जुन राम चौहान, पिछले डेढ़ महीने से लापता है। परिवार न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है, लेकिन सिस्टम की सुस्ती और कानूनी तकनीकी पेंच के बीच उनकी चीखें दबती नजर आ रही हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित पिता अधीन साय चौहान ने पुलिस और मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया को लिखित शिकायत सौंपी है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा अर्जुन राम चौहान गाँव के ही एक युवक अजीत एक्का (पिता ईमान एक्का) व अन्य साथियों के साथ कमाने-खाने आंध्र प्रदेश गया हुआ था। शुरुआती दिनों में सब ठीक था, लेकिन पिछले करीब डेढ़ महीने से अर्जुन का अपने परिवार से संपर्क पूरी तरह टूट गया और उसका मोबाइल फोन लगातार बंद आने लगा।
खौफनाक वीडियो ने उड़ाए परिजनों के होश
परिजनों की चिंता उस वक्त खौफ और मातम में बदल गई, जब बीती 1 जून 2026 को गाँव के ही एक अन्य युवक हेमंत चौहान ने परिवार को एक वीडियो दिखाया। इस वीडियो में अर्जुन को रस्सियों से बेरहमी से बांधकर एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा जानवरों की तरह पीटा जा रहा है। इस खौफनाक मंजर को देखने के बाद से ही बूढ़े माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
गाँव लौटे साथियों की संदिग्ध भूमिका, परिजनों को अनहोनी का शक
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब अर्जुन के साथ आंध्र प्रदेश गए अन्य सभी मजदूर सकुशल गाँव वापस लौट आए। पीड़ित परिजनों का गंभीर आरोप है कि गाँव लौटने के बाद ये सभी साथी उनसे नजरें चुरा रहे हैं और अर्जुन के बारे में कुछ भी साफ-साफ बताने से कतरा रहे हैं। परिजनों को पक्का अंदेशा है कि उनके बेटे के साथ कोई बहुत बड़ी अनहोनी हो चुकी है या फिर उसे किसी साजिश के तहत फंसाया जा रहा है।
परिजनों ने त्वरित कार्रवाई की आस में 6 जून 2026 को थाना कांसाबेल और फिर थक-हारकर 19 जून 2026 को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया में साक्ष्य के रूप में मारपीट की सीडी (CD) सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।



प्रशासन का पक्ष: "कार्रवाई यहाँ से नहीं होगी"
इस संवेदनशील मामले पर जब कांसाबेल थाना प्रभारी से सीधा संपर्क किया गया, तो उनका बयान कानून के पेंच और अपनी सीमाओं को उजागर करता नजर आया।
थाना प्रभारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
"इस मामले में कार्रवाई यहाँ (कांसाबेल) से नहीं होगी। हमें बस इतना पता है कि वह मिसिंग (लापता) है। हमने अपने स्तर पर वहाँ (आंध्र प्रदेश) पता लगाने की कोशिश की थी। जानकारी मिली है कि उस लड़के ने वहाँ किसी का मोबाइल चोरी किया था, जिसके बाद उसके सेठ (नियोक्ता) ने उसकी पिटाई की थी। उस घटना के बाद से वह लड़का वहाँ से कहीं भाग गया है और वर्तमान में उसके पास मोबाइल वगैरह कुछ नहीं है। यहाँ कोई रिपोर्ट दर्ज या कार्रवाई नहीं हो सकती। नियमानुसार, कार्रवाई वहीं होगी जहाँ वह लड़का आखिरी बार देखा गया था। हम यहाँ प्राप्त आवेदन को संबंधित राज्य के संबंधित थाने में फॉरवर्ड (भेज) कर देंगे, आगे की कार्रवाई वहीं से होगी।"
सीमाओं के फेर में कब तक पिसेंगे मासूम?
थाना प्रभारी का बयान अपनी जगह कानूनी तौर पर तकनीकी रूप से सही हो सकता है, लेकिन यह एक लाचार पिता और रोती हुई माँ के जख्मों पर नमक जैसा है। सवाल यह उठता है कि जशपुर के सुदूर अंचल में रहने वाला एक गरीब आदिवासी परिवार, जिसके पास अपने बेटे को तलाशने के साधन तक नहीं हैं, वह आंध्र प्रदेश जाकर भाषा और क्षेत्र की बाधाओं के बीच न्याय कैसे मांगेगा?
यदि युवक ने गलती की भी थी, तो कानून को हाथ में लेकर उसे रस्सी से बांधकर बेरहमी से पीटने का अधिकार उस सेठ को किसने दिया? और सबसे बड़ा सवाल—जो साथी अर्जुन को साथ लेकर गए थे, उनकी खामोशी और नजरें चुराना किस बात का संकेत है?
मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय और जशपुर पुलिस प्रशासन को इस मामले को केवल 'कागजी फॉरवर्ड' न मानकर, मानवीय आधार पर आंध्र प्रदेश पुलिस से उच्च स्तरीय संपर्क साधना चाहिए, ताकि छत्तीसगढ़ का एक बेटा आरोपियों के चंगुल से छूट सके और इस बंधक कांड का सच दुनिया के सामने आ सके।

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