जशपुर: मृदा स्वास्थ्य और संतुलित उर्वरक उपयोग पर बड़ी कार्यशाला, चार जिलों के कृषि वैज्ञानिक हुए शामिल
जशपुर | 5 मई 2026 कृषि विज्ञान केंद्र जशपुर में "मृदा स्वास्थ्य और संतुलित उर्वरक के उपयोग" विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला और वर्ष 2026 की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की संयुक्त बैठक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण आयोजन में जशपुर के साथ-साथ रायगढ़, कोरबा और जांजगीर-चांपा जिलों के कृषि वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया और क्षेत्रीय कृषि विकास की रणनीतियों पर मंथन किया।

मृदा परीक्षण से बढ़ेगी पैदावार
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा परीक्षण (Soil Testing) के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि मिट्टी की जांच के आधार पर खाद का उपयोग करने से न केवल फसल की पैदावार बढ़ती है, बल्कि खेती की लागत में भी कमी आती है। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के लाभ और उसके अनुसार नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं पोटाश के संतुलित उपयोग की सलाह दी गई।
अंधाधुंध उर्वरक उपयोग के प्रति चेतावनी
कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के प्रति किसानों को सचेत किया। इसके विकल्प के रूप में:
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जैविक खाद और हरी खाद को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
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सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित अनुपात की जानकारी दी गई।
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पीपीटी और प्रायोगिक प्रदर्शन के जरिए उर्वरक प्रबंधन की आधुनिक तकनीकें दिखाई गईं।

दिग्गज वैज्ञानिकों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति
वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में विभिन्न जिलों की कृषि समस्याओं और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित रहे:
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श्री सालिक साय (अध्यक्ष, जिला पंचायत जशपुर)
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डॉ. विवेक त्रिपाठी (संचालक अनुसंधान, IGKV रायपुर)
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डॉ. एस. एस. टुटेजा (निदेशक विस्तार)
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डॉ. ए. के. सिन्हा (अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय कुनकुरी)
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साथ ही कोरबा, रायगढ़ और जांजगीर-चांपा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अधिकारी।


