आरक्षक पर दुष्कर्म के आरोपों से पुलिस महकमे में खलबली, बचाव पक्ष ने आरोपों को बताया साज़िश; जाँच जारी
जशपुर | जशपुर जिले के कांसाबेल थाने में पदस्थ आरक्षक रुद्रमणी यादव के खिलाफ एक शिक्षिका द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद मामला गरमा गया है। जहाँ एक ओर पुलिस ने FIR दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी है, वहीं दूसरी ओर आरोपी पक्ष के सूत्रों और विभागीय गलियारों में इन आरोपों को आपसी विवाद या रंजिश का परिणाम बताया जा रहा है।
आरोपों के घेरे में खाकी: क्या है पूरा मामला?
एक विधवा शिक्षिका ने आरक्षक पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, जबरन गर्भपात और आर्थिक ठगी के आरोप लगाए हैं। महिला के अनुसार, फेसबुक से शुरू हुई यह दोस्ती प्रताड़ना में बदल गई। पुलिस ने शिक्षिका की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(N) और SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
बचाव पक्ष का तर्क: 'सहमति' या 'साज़िश'?
हालाँकि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन आरक्षक के करीबियों और बचाव पक्ष का कहना है कि लगाए गए आरोप एकतरफा हो सकते हैं। उनके अनुसार:
- लेन-देन का विवाद: सूत्रों का दावा है कि यह मामला आपसी वित्तीय लेन-देन में अनबन के बाद उपजे विवाद का हो सकता है, जिसे अब गंभीर आपराधिक रूप दिया जा रहा है।
- लंबे समय का संबंध: चूंकि शिकायतकर्ता ने जनवरी 2023 से जनवरी 2025 तक के घटनाक्रम का जिक्र किया है, ऐसे में बचाव पक्ष इसे 'सहमति से बने संबंध' (Consensual Relationship) और बाद में हुए मनमुटाव का मामला बता रहा है।
- छवि धूमिल करने की कोशिश: आरक्षक के समर्थकों का कहना है कि पद और प्रभाव का डर दिखाने की बात निराधार है और पुलिसिया कार्रवाई के दबाव में समझौता कराने के उद्देश्य से ऐसे आरोप लगाए गए हैं।
सोशल मीडिया और कॉल डिटेल्स पर टिकी जाँच
महिला ने आरोप लगाया है कि आरक्षक ने उसकी तस्वीरें वायरल कीं और कॉल डिटेल्स निकलवाईं। तकनीकी रूप से यह जाँच का विषय है कि क्या वास्तव में किसी आरक्षक के पास कॉल डिटेल निकालने की अनुमति थी या यह महज एक आरोप है। पुलिस साइबर सेल के माध्यम से इन डिजिटल साक्ष्यों की पुष्टि करेगी।
पुलिस का बयान: "जाँच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई"
जशपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि एफआईआर दर्ज करना प्रक्रिया का हिस्सा है। किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले दोनों पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान किया जाएगा।
"मामले में कानून अपना काम कर रहा है। चूंकि आरोप एक सरकारी कर्मचारी पर हैं और मामला महिला सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए गहन जाँच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर ही दोष सिद्ध माना जाएगा।" — जाँच अधिकारी
फिलहाल, आरक्षक रुद्रमणी यादव के खिलाफ लगे आरोपों की सत्यता भविष्य की जाँच रिपोर्ट पर टिकी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह वाकई यौन उत्पीड़न का मामला है या इसके पीछे कोई व्यक्तिगत रंजिश छिपी है।
ब्यूरो रिपोर्ट, जशपुर


