जशपुर: नहर में गंदगी फैलाई या किया अतिक्रमण तो खैर नहीं, कलेक्टर ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
जशपुरनगर | 7 फरवरी 2026 जशपुर जिले में जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को लेकर प्रशासन अब सख्त रुख अपना रहा है। जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय और कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने विगत दिनों कांसाबेल क्षेत्र की विभिन्न जल परियोजनाओं का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि नहर में घरेलू गंदा पानी बहाने या अतिक्रमण करने वालों पर न केवल भारी जुर्माना लगेगा, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

???? नहर को दूषित करने वालों पर होगी 'सर्जिकल स्ट्राइक'
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने पाया कि कुछ स्थानों पर नहरों में कचरा और गंदा पानी प्रवाहित किया जा रहा है। उन्होंने कड़े लहजे में अधिकारियों को निर्देशित किया:
जुर्माना: ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर गंदगी फैलाने वालों पर आर्थिक दंड लगाया जाए।
अतिक्रमण पर प्रहार: नहर किनारे शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्यवाही की जाए।
जन जागरूकता: ग्रामीणों को समझाइश दी जाए कि सिंचाई परियोजनाएं उनकी अपनी संपत्ति हैं, इनका संरक्षण अनिवार्य है।
???? महादेव मुड़ा एनीकट: किसानों की बदलेगी तकदीर
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर स्वीकृत महादेव मुड़ा एनीकट का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।
लागत: ₹5.45 करोड़।
विशेषता: 55 मीटर लंबी और 2.5 मीटर ऊंची इस लिफ्ट इरीगेशन परियोजना से किसान सीधे पंप लगाकर खेतों तक पानी ले जा सकेंगे।
लाभ: महादेव मुड़ा और आसपास के गांवों में सिंचाई के साथ-साथ मवेशियों के लिए भी पेयजल सुनिश्चित होगा।

????️ कुदराझरिया एनीकट और नहर का कायाकल्प
साजापानी डैम से आने वाले पानी के बेहतर प्रबंधन के लिए कुदराझरिया एनीकट की ऊंचाई बढ़ाकर 3 मीटर कर दी गई है। यहाँ से निकलने वाली 11 किमी लंबी पक्की नहर कांसाबेल से होते हुए टांगरगांव तक खेतों को सिंचित करेगी। कलेक्टर ने एनीकट के आसपास सौंदर्यीकरण की योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

✨ संतोषी तालाब बनेगा कांसाबेल की पहचान
प्रशासन की योजना कांसाबेल स्थित संतोषी तालाब को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की है। इसके लिए निम्नलिखित कार्यों की रूपरेखा तैयार की गई है:

नहर के जरिए तालाब में साल भर पानी की उपलब्धता।
चारों ओर पाथवे (पैदल पथ), आकर्षक लाइटिंग और रेलिंग का निर्माण।
आम जनता के बैठने के लिए विशेष व्यवस्था और सघन साफ-सफाई।
अधिकारियों का संदेश: सिंचाई और जल संरक्षण की ये योजनाएं क्षेत्र के भविष्य के लिए संजीवनी हैं। इनके रख-रखाव में जनभागीदारी ही सफलता की कुंजी है।





