सड़क बनी सियासत का रणक्षेत्र: अतिक्रमण, भ्रष्टाचार और ‘मार देने’ की धमकी से दहला जशपुर
(जशपुर)।
विकास की राह पर चलने वाली एक सड़क आज विवाद, भय और राजनीति के दलदल में फंस गई है। जमरगी मोड़ पारा से लेकर नेशनल हाईवे-43 तक बनने वाली 9.40 किलोमीटर लंबी सड़क अब सिर्फ निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि संघर्ष, आरोप और जान के खतरे की कहानी बन चुकी है।
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अतिक्रमण ने रोका विकास का पहिया
राजस्व रिकॉर्ड में खसरा नंबर 435 को 16 से 18 मीटर चौड़ी सड़क के रूप में दर्ज किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। स्थानीय लोगों द्वारा किए गए कथित अतिक्रमण ने सड़क को संकरा कर दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने सड़क की जमीन पर मकान और शेड खड़े कर दिए हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
लोक निर्माण विभाग (PWD) के अनुविभागीय अधिकारी द्वारा जून 2025 में अतिक्रमण हटाने के लिए पत्र भी जारी किया गया था, लेकिन अब तक कार्रवाई ठंडे बस्ते में है।
“नेतागिरी बंद करो, जान से मार दूंगा” – धमकी का सनसनीखेज आरोप
मामले ने तब आग पकड़ ली जब भाजपा मंडल महामंत्री और सड़क संघर्ष समिति के अध्यक्ष मोती बंजारा ने ठेकेदार पर सीधे जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया।
शिकायत के अनुसार, गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाने पर ठेकेदार सुरेंद्र अग्रवाल ने कथित रूप से कहा—
“तेरी नेतागिरी अंदर घुसा दूंगा… तुझे और तेरे परिवार को खत्म कर दूंगा।”
बंजारा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है।
PWD का जवाब: “कोई शिकायत नहीं, काम गुणवत्तापूर्ण”
जब इस पूरे मामले पर PWD के SDO एस.के. पैंकरा से फोन पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने साफ कहा—
- विभाग के पास कोई शिकायत नहीं आई है
- सोशल मीडिया में वायरल वीडियो की जानकारी से इंकार किया
- सड़क निर्माण को पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण बताया
वहीं, ठेकेदार से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
राजनीति ने और उलझाया मामला
भाजपा मंडल अध्यक्ष मीना चौहान ने भी इस विवाद को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए।
उन्होंने बताया—
- PWD द्वारा पहले ही FIR दर्ज कराई जा चुकी है
- बंजारा समाज के घरों को तोड़ा गया, जबकि अन्य कब्जों पर कार्रवाई नहीं हुई
- ठेकेदार पर राजनीतिक टिप्पणी और अभद्र व्यवहार के आरोप
- मोती बंजारा द्वारा उन्हें भी जान से मारने की धमकी की जानकारी दी गई
वहीं, मोती बंजारा का आरोप है कि काला झंडा दिखाने और राजनीतिक कारणों से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत, फिर भी कार्रवाई शून्य
21 अप्रैल 2026 को क्षेत्रवासियों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अतिक्रमण हटाने और निष्पक्ष जांच की मांग की।
लेकिन सवाल वही है—
क्या शिकायतें सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएंगी?
सबसे बड़ा सवाल: क्या आवाज उठाना अब जुर्म है?
इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
- क्या निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार पर सवाल उठाना अब जान जोखिम में डालना है?
- क्या प्रशासन शिकायतकर्ता को ही आरोपी बना रहा है?
- क्या विकास कार्य राजनीति की भेंट चढ़ रहे हैं?
अगर एक जनप्रतिनिधि खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है, तो आम नागरिक की स्थिति क्या होगी?
निष्कर्ष: खामोशी या कार्रवाई?
जशपुर की यह सड़क अब सिर्फ कंक्रीट और डामर की नहीं, बल्कि सिस्टम की सच्चाई की कहानी बन चुकी है।
अतिक्रमण, प्रशासनिक चुप्पी, ठेकेदारी व्यवस्था और राजनीतिक टकराव—इन सबके बीच सबसे बड़ा नुकसान जनता का हो रहा है।
अब देखना होगा—
प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
(नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित पक्षों के बयानों पर आधारित है। प्रशासनिक जांच के बाद तथ्यों में बदलाव संभव है।)






