छत्तीसगढ़ में गाय को 'राज्य माता' का दर्जा देने की मांग: 'गो सम्मान आह्वान अभियान' के तहत मुख्यमंत्री को सौंपा गया पत्र
नवा रायपुर / जशपुर:
छत्तीसगढ़ के 'गो-भक्तों', संत समाज और जागरूक नागरिकों ने एक स्वर में राज्य में गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए आवाज बुलंद की है। 'गो सम्मान आह्वान अभियान' के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक औपचारिक प्रार्थना पत्र भेजकर गायों के प्रति सम्मान और उनकी सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं।
मुख्य मांगें और प्रस्ताव
प्रार्थना पत्र में मुख्यमंत्री से निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करने का विनम्र निवेदन किया गया है:
- राज्य माता का दर्जा: अखिल वेदलक्षणा गोमाता (सम्पूर्ण देशी गोवंश) को छत्तीसगढ़ की 'राज्य माता' घोषित किया जाए।
- राष्ट्रमाता के लिए अनुशंसा: केंद्र सरकार को गाय को 'राष्ट्रमाता' का सम्मान दिलाने हेतु राज्य की ओर से आधिकारिक अनुशंसा भेजी जाए।
- गो-आधारित अर्थव्यवस्था: प्रदेश में गो-आधारित अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
- प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: 'धान का कटोरा' कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में रासायनिक खाद के दुष्प्रभावों से बचने के लिए गो-आधारित प्राकृतिक कृषि और जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जाए।
सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व पर जोर
पत्र में उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्री राम का ननिहाल और माता कौशल्या की पावन धरा है। यहाँ की संस्कृति में गो-सेवा का गहरा महत्व है। गोवंश न केवल श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जनजीवन, कृषि और अर्थव्यवस्था की रीढ़ (Backbone) भी है।
अभियान के समर्थकों का कहना है कि गोवंश का संरक्षण वास्तव में जन-स्वास्थ्य और मिट्टी की उर्वरता की रक्षा करना है। यह कदम आने वाली पीढ़ियों को 'जहर मुक्त' सात्विक आहार प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगा।
जशपुर से उठी आवाज
यह विशेष पत्र जशपुर जिले के कांसाबेल (Kansabel) तहसील के माध्यम से प्रेषित किया गया है, जिस पर 27 अप्रैल 2026 की तिथि और आधिकारिक मुहर अंकित है। इस अभियान को संतों और समाज के विभिन्न वर्गों का व्यापक समर्थन मिल रहा है।
अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस संवेदनशील और सांस्कृतिक विषय पर क्या निर्णय लेती है।


