विशेष लेख: जशपुर के अंकित ने पेश की 'स्मार्ट खेती' की मिसाल; मछली, मुर्गी और बागवानी से बदली अपनी तकदीर

विशेष लेख: जशपुर के अंकित ने पेश की 'स्मार्ट खेती' की मिसाल; मछली, मुर्गी और बागवानी से बदली अपनी तकदीर

शासन की योजना से मिला 8 लाख का अनुदान, पारंपरिक खेती छोड़ अपनाया नवाचार

जशपुरनगर | 24 मार्च 2026 छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में खेती-किसानी अब केवल धान तक सीमित नहीं रही। ग्राम रतबा के एक ऊर्जावान युवा किसान अंकित लकड़ा ने अपनी मेहनत और आधुनिक सोच से यह साबित कर दिया है कि यदि सही तकनीक और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो खेती लाभ का सौदा बन सकती है। अंकित आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा के स्रोत बन गए हैं।

एकीकृत कृषि मॉडल: एक ही स्थान पर मछली और मुर्गी पालन

अंकित ने नवाचार करते हुए अपने खेत में दो बड़े तालाब बनवाए हैं। उन्होंने एक बेहद स्मार्ट तकनीक अपनाई है:

तालाब के ऊपर शेड: उन्होंने तालाब के ठीक ऊपर 1000 से 1200 मुर्गियों की क्षमता वाला शेड बनाया है।

लागत में कमी: मुर्गियों का अपशिष्ट (वेस्ट) सीधे तालाब में गिरता है, जो मछलियों के लिए प्राकृतिक और पौष्टिक आहार का काम करता है। इससे मछली पालन की लागत में भारी कमी आई है।

सरकारी योजनाओं ने दी नई उड़ान

अंकित की इस सफलता के पीछे प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का बड़ा हाथ है।

उन्हें मत्स्य विभाग की ओर से 8 लाख रुपए की अनुदान राशि प्राप्त हुई है।

इसके साथ ही शासन द्वारा उन्हें पॉड लाइनर (पॉलीथिन), बोरवेल, मोटर और मछली दाना (फीड) जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

बहुफसली खेती और पर्यावरण संरक्षण

सिर्फ मछली और मुर्गी ही नहीं, अंकित ने अपने प्रक्षेत्र को 'मल्टी-लेयर फार्मिंग' का रूप दिया है:

बागवानी: तालाब के पानी का उपयोग कर वे गर्मी के मौसम में भी सब्जियां उगाते हैं।

मेड़ों पर फलदार वृक्ष: तालाब की मेड़ों पर उन्होंने आम और लीची के पेड़ लगाए हैं। ये पेड़ न केवल अतिरिक्त आय देते हैं, बल्कि इनकी जड़ें मिट्टी को बांधकर रखती हैं, जिससे तालाब की मेड़ों का कटाव नहीं होता।

नवाचार से बढ़ी आय

अंकित लकड़ा बताते हैं कि पहले वे केवल बरसात में धान की खेती पर निर्भर थे, लेकिन अब तालाब बनने के बाद वे सालों भर खेती और पशुपालन से आय अर्जित कर रहे हैं। उनके इस मॉडल ने जल संरक्षण और आय के विविधीकरण की नई राह दिखाई है।

संदेश: यदि आप भी अंकित जैसे सफल किसानों के अनुभव साझा करना चाहते हैं और आधुनिक खेती की तकनीक सीखना चाहते हैं, तो 'कृषि क्रांति एक्सप्रेस 2.0' में अवश्य शामिल हों।