दुर्गम पहाड़ियों के बीच 'हर घर जल' की गूंज: जशपुर का बस्तला गांव बना मिसाल
39 परिवारों की दहलीज तक पहुँचा स्वच्छ पेयजल; महिलाओं को मिली लंबी दूरी और बीमारियों से मुक्ति
जशपुरनगर, 23 मार्च 2026 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में 'जल जीवन मिशन' मील का पत्थर साबित हो रहा है। इसी कड़ी में जशपुर जिले के दुलदुला विकासखण्ड का सुदूर ग्राम बस्तला विकास की एक नई इबारत लिख रहा है। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसे इस गांव ने 'हर घर जल' के लक्ष्य को हासिल कर एक सशक्त उदाहरण पेश किया है।

चुनौतियों भरा था सफर
झारखंड सीमा के समीप स्थित बस्तला भौगोलिक रूप से बेहद कठिन क्षेत्र है। योजना के क्रियान्वयन से पहले यहाँ की स्थिति काफी दयनीय थी:
महिलाओं का संघर्ष: पीने के पानी के लिए महिलाओं और बालिकाओं को लंबी दूरी तय कर हैंडपंपों और कुओं पर निर्भर रहना पड़ता था।
स्वास्थ्य का संकट: बरसात में दूषित और मटमैला पानी पीने से दस्त, उल्टी और जलजनित बीमारियों का प्रकोप बना रहता था।
समय की बर्बादी: पानी लाने में घंटों समय व्यतीत होने के कारण बच्चों की शिक्षा और महिलाओं के आर्थिक कार्य प्रभावित होते थे।
तकनीकी सुदृढ़ीकरण और सामुदायिक सहभागिता
इन चुनौतियों को समाप्त करने के लिए जल जीवन मिशन के तहत गांव में 10 किलोलीटर क्षमता का उच्च स्तरीय जलागार (ओवरहेड टैंक) बनाया गया। पूरे गांव में पाइपलाइन बिछाकर 39 परिवारों को फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) से जोड़ा गया है।
योजना की सफलता का मुख्य आधार 'जल एवं स्वच्छता समिति' का गठन है। स्थानीय युवाओं को पंप ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जिससे रखरखाव और संचालन का काम ग्रामीण स्वयं कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों में योजना के प्रति स्वामित्व की भावना जागृत हुई है।
बदली गांव की तस्वीर: शिक्षा और सशक्तिकरण को मिला बढ़ावा
स्वच्छ जल की उपलब्धता ने बस्तला के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को बदल दिया है:
स्वास्थ्य में सुधार: शुद्ध पेयजल से बीमारियों में भारी कमी आई है, जिससे ग्रामीणों का इलाज पर होने वाला खर्च बचा है।
शिक्षा पर ध्यान: अब बच्चों को पानी ढोने के काम से मुक्ति मिल गई है, जिससे स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ी है।
महिला सशक्तिकरण: महिलाएं अब बचे हुए समय का उपयोग बच्चों की देखभाल और आयवर्धक गतिविधियों में कर रही हैं।
"जल जीवन मिशन ने हमारे जीवन को न केवल सरल बल्कि सम्मानजनक भी बनाया है। अब हमें पानी के लिए पहाड़ों और जंगलों की खाक नहीं छाननी पड़ती।"
— ग्रामीण, ग्राम बस्तला
ग्राम बस्तला की यह सफलता कहानी साबित करती है कि यदि मजबूत इच्छाशक्ति और सही प्रबंधन हो, तो दुर्गम से दुर्गम क्षेत्रों में भी विकास की धारा पहुंचाई जा सकती है। आज यह गांव पूरे जिले के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।





