आजमगढ़: डॉक्टर की 'दबंगई' से शर्मसार हुई मानवता, इलाज के बजाए बुजुर्ग महिला का हाथ मरोड़ा, बेटे को पीटा
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने लिया संज्ञान, 3 दिन में मांगी रिपोर्ट; सीसीटीवी फुटेज खंगालने के निर्देश
आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ स्थित मंडलीय अस्पताल से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने 'धरती के भगवान' कहे जाने वाले डॉक्टरों के पेशे को कलंकित कर दिया है। यहां ऑर्थोपेडिक वार्ड में इलाज कराने आई एक 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला और उनके बेटे के साथ न केवल बदसलूकी की गई, बल्कि आरोप है कि डॉक्टर ने बुजुर्ग महिला का हाथ मरोड़कर उन्हें ओपीडी से बाहर निकाल दिया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हुआ और पीड़ित बेटा अपनी मां की हालत देख बिलखता नजर आया।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, जहानागंज थाना क्षेत्र के करनपुर निवासी 85 वर्षीय सावित्री सिंह घर में गिरने के कारण हाथ फैक्चर होने से घायल हो गई थीं। गुरुवार को उनका बेटा देवेंद्र सिंह उन्हें लेकर मंडलीय अस्पताल के कमरा नंबर 26 में ऑर्थो सर्जन डॉ. विनोद कुमार के पास पहुंचा।
पीड़ित देवेंद्र का आरोप है कि ओपीडी में भीड़ कम होने के बावजूद डॉ. विनोद ने उसकी मां को देखने से मना कर दिया। जब बुजुर्ग मां ने दर्द के कारण हाथ देखने की गुहार लगाई, तो डॉक्टर आगबबूला हो गए। आरोप है कि डॉक्टर ने वृद्ध महिला का हाथ मरोड़ते हुए उन्हें धक्के देकर बाहर निकाला और विरोध करने पर देवेंद्र के साथ भी हाथापाई की।
"मां के हाथ ऐंठ दिए, अब परहेज कैसे कराऊं"
अस्पताल परिसर में फूट-फूटकर रोते हुए देवेंद्र ने कहा, "अगर मैंने कोई बदतमीजी की थी तो मुझे सजा देते, मेरी मां के हाथ क्यों ऐंठ दिए? अब मैं उनका परहेज और इलाज कैसे करा पाऊंगा?" पीड़ित बेटे की यह गुहार सुनकर वहां मौजूद अन्य मरीज और तीमारदार भी आक्रोशित हो गए, जिसके बाद आरोपी डॉक्टर केबिन छोड़कर फरार हो गए।
शासन-प्रशासन की कार्रवाई
मामले की गंभीरता और वीडियो वायरल होने के बाद सूबे के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि:
- अपर निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग को मौके पर जांच के निर्देश दिए गए हैं।
- 3 दिन के भीतर विस्तृत जांच आख्या और सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने को कहा गया है।
- डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि मरीजों के साथ अभद्र व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
वहीँ, मंडलीय अस्पताल के एसआईसी डॉ. सतीश कन्नौजिया ने बताया कि मामले की जांच के लिए एक टीम गठित कर दी गई है। पुलिस ने भी पीड़ित महिला की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
अस्पताल में सुरक्षा और संवेदनशीलता पर सवाल
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और डॉक्टरों की संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अस्पताल में ही मरीज सुरक्षित नहीं हैं और डॉक्टरों का व्यवहार हिंसक है, तो गरीब जनता कहां जाएगी? फिलहाल, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।





