कांसाबेल शराब दुकान विवाद: प्रशासन और ग्रामीणों के बीच तीखी झड़प, 15 दिनों के भीतर दुकान हटाने का अल्टीमेटम
कांसाबेल | जशपुर जिले के कांसाबेल में शासकीय शराब दुकान के स्थान परिवर्तन को लेकर शुरू हुआ विरोध अब आर-पार की जंग में बदल गया है। सिहारबूढ़ से हटाकर शराब दुकान को दोबारा कांसाबेल के पुराने स्थान पर शिफ्ट किए जाने के विरोध में ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। धरने के दौरान कल उस वक्त स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच जबरदस्त तीखी बहस हुई।
अधिकारियों का घेराव और नियमों पर सवाल
विवाद की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार चंद्र प्रकाश सिंह, आबकारी उपनिरीक्षक यज्ञ शरण शुक्ला पत्थलगांव थाना प्रभारी जितेंद्र ताम्रकार कांसाबेल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। इस दौरान स्थानीय सरपंच, उपसरपंच और बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीणों ने अधिकारियों को घेर लिया। ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि आखिर किन नियमों के तहत छात्रावास और मंदिर के नजदीक शराब दुकान को अनुमति दी गई? ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि आस्था के केंद्र और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
15 दिनों की मोहलत, वर्ना होगा चक्काजाम
प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक चली खींचतान के बाद ग्रामीणों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं:
-
नई जगह की तलाश: अगले 15 दिनों के भीतर पंचायत और पटवारी मिलकर दुकान के लिए कोई अन्य उपयुक्त स्थान खोजेंगे।
-
अस्थायी सहमति: फिलहाल दुकान वर्तमान स्थान पर चलेगी, लेकिन 15 दिन बाद इसे हटाना अनिवार्य होगा।
-
आंदोलन की चेतावनी: यदि समय सीमा के भीतर निर्णय नहीं हुआ, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन और चक्काजाम करेंगे।
प्रशासन का आश्वासन
तहसीलदार चंद्र प्रकाश सिंह ने ग्रामीणों की मांगों को जायज बताते हुए आश्वासन दिया है कि राजस्व विभाग और ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि मिलकर जल्द ही ऐसी जगह का चयन करेंगे, जो रिहायशी इलाके और शैक्षणिक संस्थानों से दूर हो। इस आश्वासन के बाद फिलहाल धरना स्थगित कर दिया गया है।
सरपंच की चेतावनी
ग्रामीण नेतृत्व का कहना है कि यह बच्चों के भविष्य और आस्था का सवाल है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि 15 दिनों में प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो कांसाबेल एक बड़े जन-आंदोलन का गवाह बनेगा।





