खरीफ वर्ष 2026 की तैयारी जोरों पर: कलेक्टर के निर्देशानुसार किसानों को दिया जा रहा संतुलित उर्वरक उपयोग का प्रशिक्षण

खरीफ वर्ष 2026 की तैयारी जोरों पर: कलेक्टर के निर्देशानुसार किसानों को दिया जा रहा संतुलित उर्वरक उपयोग का प्रशिक्षण


जशपुरनगर | 14 अप्रैल 2026 जशपुर जिले में खरीफ वर्ष 2026 के लिए कृषि विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर श्री रोहित व्यास के दिशा-निर्देशानुसार, विभाग द्वारा किसानों को आगामी सीजन में फसलों के बेहतर उत्पादन और लागत कम करने के उद्देश्य से संतुलित उर्वरक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग पर जोर इन्दिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के प्रयोगों के आधार पर कृषि विभाग ने किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग की सलाह दी है:

  • तरल नैनो यूरिया: 4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर फसल के 40-45 और 55-60 दिनों पर छिड़काव करने से पारंपरिक नाइट्रोजन उर्वरक की खपत में 25 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है।

  • तरल नैनो डीएपी: 5 मिलीलीटर प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार और फसल के 30 दिन होने पर 2 मिलीलीटर प्रति लीटर का छिड़काव करने से फास्फोरस की मात्रा में 25 प्रतिशत की बचत संभव है।

इन तकनीकों के प्रचार-प्रसार के लिए सहकारी समितियों और डबल लॉक केंद्रों पर पोस्टर एवं फ्लेक्सी चस्पा किए जा रहे हैं।

उर्वरक उपलब्धता और डिजिटल वितरण प्रणाली जिले के लिए खरीफ सीजन हेतु कुल 25,675.00 मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में डबल लॉक और सहकारी समितियों में 8,446.02 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है।

पारदर्शिता बनाए रखने के लिए किसानों की धारित भूमि के आधार पर सॉफ्टवेयर के माध्यम से वितरण की तैयारी की जा रही है। 'फार्मर आईडी' बनाने का कार्य प्रगति पर है और भविष्य में इसी आईडी के आधार पर खाद का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।

जैविक खाद को बढ़ावा और सख्त निगरानी मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले के 1,600 किसानों ने 800 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 160 क्विंटल बीज की मांग की है। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र और शासकीय कृषि प्रक्षेत्र सुसडेगा में कुल 16 टांकों का निर्माण किया जा रहा है।

प्रशासन की सख्त चेतावनी: * सहकारी एवं निजी केंद्रों की सतत निगरानी के लिए विशेष दलों का गठन किया गया है ताकि किसानों को उचित मूल्य पर सामग्री मिले।

  • उर्वरकों के साथ नैनो उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व या कीटनाशक जैसी सामग्री खरीदने के लिए किसानों को बाध्य नहीं किया जा सकेगा। * अनुदानित उर्वरक का गैर-कृषि कार्यों में उपयोग (डायवर्सन) पाए जाने पर 'उर्वरक गुण नियंत्रण अधिनियम 1985' के तहत कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी।