विशेष रिपोर्ट: राष्ट्रपति के 'दत्तक पुत्रों' के हक पर पंचायत की दबंगई, प्यासे पहाड़ी कोरवा ढोंढ़ी का दूषित पानी पीने को मजबूर

विशेष रिपोर्ट: राष्ट्रपति के 'दत्तक पुत्रों' के हक पर पंचायत की दबंगई, प्यासे पहाड़ी कोरवा ढोंढ़ी का दूषित पानी पीने को मजबूर

महनई पंचायत का कारनामा: कोरवा बस्ती के लिए स्वीकृत कुएं को 1 किलोमीटर दूर रसूखदार की निजी जमीन पर शिफ्ट किया, जंगल के बीच हो रहा निर्माण

बगीचा/जशपुर | 24 मार्च 2026 एक ओर सरकार 'नल-जल योजना' और 'पीएम जनमन' के जरिए विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवाओं के विकास के दावे कर रही है, वहीं जशपुर जिले के बगीचा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत महनई से मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ के वार्ड क्रमांक 6 (गराज) में रहने वाले लगभग 25 पहाड़ी कोरवा परिवार भीषण जल संकट के कारण खुद से खोदी गई 'ढोंढ़ी' (कच्चा गड्ढा) का सड़ा-गला और दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा प्यास बुझाने का जरिया

ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच और सचिव की मनमानी एवं दबंगई के कारण उनके हक का गला घोंटा गया है। कोरवा बस्ती के लिए करीब 1.5 लाख रुपये की लागत से एक सार्वजनिक कुआं स्वीकृत हुआ था। नियमतः इसे बस्ती के बीच बनना था, लेकिन रसूखदारों से सांठगांठ कर इस कुएं को बस्ती से 1 किलोमीटर दूर अरविंद यादव नामक व्यक्ति की निजी भूमि पर बनाया जा रहा है।

शमशान जैसी वीरान जगह पर कुआं, मस्टर रोल में भी खेल!

मौके का दृश्य हैरान करने वाला है। जहाँ कुआं खोदा जा रहा है, वहाँ दूर-दूर तक कोई आबादी नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस व्यक्ति की जमीन पर कुआं बन रहा है, उसका वहां मकान तक नहीं है, केवल खेती की जमीन है। हद तो यह है कि इस निर्माण कार्य में एक ही परिवार के लोग काम कर रहे हैं और मनमाने ढंग से नरेगा (MGNREGA) में हाजिरी भरकर सरकारी राशि का बंदरबांट किया जा रहा है।

सचिव का कबूलनामा: "बस्ती में बनना था, पर दूर बना रहे हैं"

इस मामले में जब पंचायत सचिव रामचरण यादव से चर्चा की गई, तो उन्होंने चौंकाने वाला स्वीकारोक्ति दी। सचिव ने माना कि कुआं पहाड़ी कोरवा बस्ती में बनना था, लेकिन इसे रविंद्र यादव की निजी भूमि पर बनाया जा रहा है। सचिव का तर्क है कि स्वीकृत स्थान से 100 मीटर की दूरी पर कहीं भी निर्माण कराया जा सकता है, लेकिन सवाल यह है कि 100 मीटर की आड़ में इसे 1000 मीटर दूर जंगल के बीच क्यों ले जाया गया?

सिस्टम की बेरुखी: गुहार लगाने गए कोरवाओं को नहीं मिली पावती

अपनी प्यास और हक की लड़ाई लड़ने जब ये पहाड़ी कोरवा जनपद कार्यालय बगीचा पहुंचे, तो वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने आवेदन देकर अपनी आपबीती सुनाई, लेकिन दफ्तर के बाबूओं ने उन्हें पावती (Receipt) तक देना मुनासिब नहीं समझा।

गंभीर बीमारी का खतरा

वर्तमान में ये पहाड़ी कोरवा जिस ढोंढ़ी का पानी पी रहे हैं, उसमें पेड़ों की पत्तियां गिरकर सड़ रही हैं। दूषित जल के सेवन से बस्ती में महामारी फैलने का खतरा मंडरा रहा है। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले इन आदिवासियों के साथ हो रहा यह सौतेला व्यवहार जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

अब देखना यह होगा कि खबर प्रकाशन के बाद जशपुर कलेक्टर इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं और क्या इन प्यासे आदिवासियों को उनका हक मिल पाएगा?