मत्स्य पालन से जशपुर के किसानों में बढ़ी आत्मनिर्भरता: पीएम मत्स्य संपदा योजना से बना 22,805 मीट्रिक टन उत्पादन का नया रिकॉर्ड
जशपुर, 13 जून 2026:
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिला मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में एक नए पावरहाउस के रूप में उभर रहा है। शासन की कल्याणकारी नीतियों और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से जिले के ग्रामीण अंचलों में आर्थिक समृद्धि का एक नया दौर शुरू हो चुका है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) जशपुर के किसानों और मत्स्य पालकों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिससे न केवल उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ी है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी जबरदस्त मजबूती मिली है।

22 महीनों में रचा इतिहास: 22,805 मीट्रिक टन का रिकॉर्ड उत्पादन
जशपुर जिले ने मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 22 महीनों में जिले के भीतर रिकॉर्ड 22,805 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि पारंपरिक कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन अब जशपुर के किसानों के लिए आय का एक बड़ा और भरोसेमंद जरिया बन चुका है।

मजबूत ढांचा: करोड़ों बीज संचयन और आधुनिक तकनीक का सहारा
मछली पालन विभाग से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, जिले में मत्स्य पालन के बुनियादी ढांचे को बेहद मजबूत किया गया है। इसके तहत जिले के जलस्रोतों में:
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18.50 करोड़ स्पॉन (Spawn)
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2.55 करोड़ स्टे फ्राय (Stage Fry)
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2.94 करोड़ उन्नत मछली बीजों का संचयन किया गया है।
इसके साथ ही, किसानों को आधुनिक प्रशिक्षण, उन्नत तकनीक और भारी अनुदान देकर सीधे तौर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
7,000 से अधिक हितग्राहियों को मिला पट्टा और सहायता का लाभ
ग्रामीण स्तर पर रोजगार और स्व-रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर जलस्रोतों को स्थानीय स्तर पर आवंटित किया गया है। जिले में 77.67 हेक्टेयर तालाब और 295.27 हेक्टेयर जलाशयों का पट्टा मत्स्य पालकों को सौंपा गया है।
योजना के जरिए 7,000 से अधिक हितग्राहियों को सीधे तौर पर लाभान्वित किया गया है, जिन्हें मछली पकड़ने के लिए नाव, जाल, फिंगरलिंग (उन्नत बीज), बीमा कवर और बाजार में सही मूल्य पर विक्रय सहायता जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
60% तक का भारी अनुदान और बायोफ्लॉक तकनीक
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य व्यवसाय में विविधता लाने के लिए किसानों को विशेष रियायतें दी जा रही हैं। नए तालाबों के निर्माण, पौण्ड लाइनर लगाने और कम जगह में अधिक उत्पादन देने वाली बायोफ्लॉक (Biofloc) इकाइयों की स्थापना के लिए हितग्राहियों को 60 प्रतिशत तक का भारी अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इससे छोटे और सीमांत किसान भी इस मुनाफे वाले व्यवसाय से जुड़ने में सफल हो रहे हैं।


अंतर्राज्यीय एक्सपोजर विजिट: अन्य राज्यों में जाकर वैज्ञानिक तरीके सीख रहे हैं किसान
जशपुर के मत्स्य पालकों को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित न रखकर, उन्हें देश के अन्य राज्यों में एक्सपोजर विजिट (अध्ययन यात्रा) पर भेजा जा रहा है। इस विशेष पहल का उद्देश्य यह है कि स्थानीय मत्स्य पालक समूह और किसान राष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक तकनीकों से रूबरू हो सकें। इस यात्रा के माध्यम से किसानों को:
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आधुनिक तालाब एवं बीज प्रबंधन
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उन्नत आहार और मछलियों की उचित देखभाल
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रोग नियंत्रण और उससे बचाव के वैज्ञानिक तरीके
की व्यावहारिक और सटीक जानकारी मिल रही है, जिसे वे अपने क्षेत्रों में लागू कर उत्पादन को और बेहतर बना रहे हैं।
(रिपोर्ट साभार: सहायक संचालक जनसंपर्क जशपुर, श्रीमती नूतन सिदार)


